न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा कौन हैं? दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के बंगले में आग लगने से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक प्रतिकूल रिपोर्ट के बाद न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की।

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरण

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, यह निर्णय उनके खिलाफ आई “प्रतिकूल रिपोर्ट” के बाद लिया गया। न्यायमूर्ति वर्मा ने अक्टूबर 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

न्यायमूर्ति वर्मा के घर आग और नकदी मिलने की खबर

यह फैसला उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें The Times of India ने दावा किया था कि न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई

ToI की रिपोर्ट के अनुसार, जब 14 मार्च को उनके घर में आग लगी, तब न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली में मौजूद नहीं थे। उनके परिवार के सदस्यों ने दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दी। जब आग पर काबू पाया गया, तो पहली प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी मिली। इस बरामदगी को लेकर आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि यह अघोषित संपत्ति हो सकती है।


कौन हैं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा?

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

  • जन्म: 6 जनवरी 1969, इलाहाबाद
  • शिक्षा:
    • B.Com (Hons) – हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
    • LLB – रीवा विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश
  • एडवोकेट के रूप में नामांकन: 8 अगस्त 1992

न्यायिक करियर

  • 13 अक्टूबर 2014: इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त।
  • 1 फरवरी 2016: स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत।
  • 11 अक्टूबर 2021: दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित।

विशेषज्ञता और प्रमुख भूमिकाएँ

  • न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने कानूनी करियर में संविधान कानून, श्रम एवं औद्योगिक कानून, कॉर्पोरेट कानून, कराधान (टैक्सेशन) और संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की।
  • उन्होंने 2006 से अपनी पदोन्नति तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के विशेष वकील के रूप में कार्य किया।
  • 2012 से अगस्त 2013 तक उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी वकील के रूप में भी सेवा दी।
  • इसके बाद, उन्हें कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) के रूप में नामित किया गया

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से न्यायमूर्ति वर्मा के स्थानांतरण की सिफारिश संबंधी आधिकारिक प्रस्ताव अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस मामले में आंतरिक जांच (इन-हाउस इंक्वायरी) की संभावना भी जताई जा रही है। अब देखना होगा कि क्या इस स्थानांतरण के अलावा और कोई विधिक कार्रवाई की जाती है या नहीं।